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Friday, 26 October 2012

स्कूलों की मान्यता के नियम होंगे सरल

स्कूलों की मान्यता के नियम होंगे सरल
हरिशंकर मिश्र, इलाहाबाद माध्यमिक स्कूलों की मान्यता में सरकार अब उदार होने जा रही है। इसके लिए न सिर्फ नियमों को सरल किया जाएगा बल्कि पूरी प्रक्रिया में अफसरों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। इसके लिए शासन ने यूपी बोर्ड के सचिव उपेंद्र कुमार की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी कर दिया है जिसकी पहली बैठक शुक्रवार को मुख्यालय में होगी। इस बैठक में लिए गए निर्णयों को शासन को संदर्भित किया जाएगा। प्रदेश में वित्त विहीन मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या करीब 15 हजार है जो कि यूपी बोर्ड में लगातार बढ़ रहे छात्रों की संख्या के हिसाब से नाकाफी है। जरूरत के हिसाब से निजी स्कूलों को मान्यता भी नहीं मिल पा रही है। कहीं कड़े नियम आड़े आ रहे हैं तो कहीं इन्हीं नियमों की आड़ में जिला विद्यालय निरीक्षक व संयुक्त शिक्षा निदेशकों द्वारा फाइलें लटका दी जाती हैं। स्थिति यह है कि बोर्ड मुख्यालय में मान्यता समिति की तीन बैठकों में सिर्फ 369 विद्यालयों की मान्यता के लिए ही संस्तुति की जा सकी है। इसे देखते हुए ही सरकार नियमों को और उदार बनाना चाहती है ताकि अधिक से अधिक स्कूलों को मान्यता मिल सके। पिछले दिनों माध्यमिक शिक्षा सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा के निर्देश पर शिक्षा निदेशक वासुदेव यादव ने इस पर सुझाव देने के लिए कमेटी गठित की थी। इसमें बोर्ड के सचिव समेत अपर सचिव, क्षेत्रीय सचिव के अलावा दो प्रधानाचार्य भी शामिल किए गए हैं। यह कमेटी विद्यालयों के लिए मान्यता की प्रक्रिया की समीक्षा भी करेगी। इसके तहत यह भी तय किया जा सकता है कि आवेदन-पत्र पर जिला विद्यालय निरीक्षक और संयुक्त शिक्षा निदेशक द्वारा कितने दिन में फैसला लेना जरूरी होगा। इससे मान्यता के आवेदन पत्रों में बेवजह का विलंब नहीं हो सकेगा। अभी काफी लंबी है प्रक्रिया : वर्तमान समय में स्कूलों की मान्यता के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया काफी लंबी है। आवेदन में अग्निशमन विभाग और नेशनल बिल्ंिडग कोड के तहत जारी किए जाने वाला अनापत्ति प्रमाणपत्र जरूरी है। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक जांच करके अपनी रिपोर्ट अपर सचिव को भेजता है। वहां से संयुक्त शिक्षा निदेशक के पास रिपोर्ट भेजकर क्रास चेकिंग कराई जाती है। उसकी रिपोर्ट के बाद आवेदन पर मान्यता समिति की बैठक में विचार किया जाता है, जहां से शासन को संस्तुति की जाती है।
Source - Jagran

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